Wednesday, 26 September 2012

सेकेंड हैंड लव

ड्रीम वर्ल्ड कॉलेज का फेयरवेल फंक्शन चल रहा था। पूरा हॉल गुब्बारों और रंग-बिरंगी झालरों से सजा हुआ था। लोगों के जोर-जोर से खुशी के चिल्लाने का आवाज आ रही थी। पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज रहा था, पर जैसे ही पंकज का नाम एनांउस हुआ, पूरे हॉल में सन्नाटा पसर गया। पंकज सर झुकाए हॉल के एक कोने में बैठा था। उसे इस बात का होश ही नहीं था कि उसके आस-पास क्या हो रहा है। पंकज के दोस्त शोभित ने उसे झकझोरा,
पंकज जा तेरा नाम एनांउस हुआ है, डायरेक्टर सर कब से बुला रहे है। डिग्री नहीं लेनी क्या?”
पंकज ने सर उठाकर एक नजर अपने चारों तरफ दौड़ाई। सब उसे ही घूर रहे थे, जैसे वो किसी म्यूजियम में रखा अद्भुत पुतला हो या फिर किसी सर्कस का जोकर।
पंकज उठा और डिग्री लेकर वापस उसी कोने में बैठ गया। पंकज की हालत कॉलेज में किसी से नहीं छुपी थी। वो हमेशा अव्वल नंबर से पास होने वाला और यारों का यार कहलाने वाला इंसान था। 3 सालों से डिग्री मिलने के इंतजार करने वाले पंकज को आज उसके मिलने की जरा भी खुशी नहीं थी या उसे इस खुशी की एहसास ही नहीं था। पंकज के लिए प्रिया को खोने का दर्द इतना ज्यादा बड़ा था कि उसके आगे आज उस सपने की भी कोई एहमियत नहीं थी जिसे लेकर वो शहर पढ़ने आया था।
कभी-कभी ऐसा लगता था कि मानों पंकज की किस्मत ने उसके लिए सिर्फ मुसीबतें ही लिखी थी। पंकज के गांव में स्कूल नहीं था इसलिए अपने कस्बे से 18 किमी. दूर साइकिल चलाकर कंकरीले-पथरीले रास्तों का पार कर स्कूल पढ़ने जाया करता था। 12वीं तक की पढ़ाई में पंकज अव्वल नंबरों से पास हुआ। पंकज आगे पढ़ने के लिए बमुश्किल अपने माता-पिता को मनाकर शहर पढ़ने आ गया। पंकज के अच्छे नंबरों और मेहनत के चलते उसे शहर में स्कॉलरशिप मिल रही थी।
कॉलेज का पहला दिन था, पंकज की आंखों में एक अलग ही चमक थी। सब एक-दूसरे से परिचय करने में लगे थे कि तभी क्लास में प्रिया की एंट्री होती है। लंबे-लंबे बाल, चेहरे पर आती पतली से लट, आंखों में काजल लगाए, लाल टॉप और ब्लू जींस पर करीब 5 इंच की सैंडिल पहने प्रिया कमाल लग रही थी। क्लास के सभी लड़के तो उसे मुंह खोले देखते रह गए जैसे सदियों से भूखे भिखारियों के आगे किसी ने लजीज व्यंजन रख दिए हो।
हाय, प्रिया शोभा ने पीछे से प्रिया के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
ओ हाय प्रिया बोली
शोभा,प्रिया की दोस्त थी। दोनों आपस में बातें करने लगी। प्रिया पढ़ाई में ज्यादा होशियार नहीं थी पर बेहद घमंडी थी।अपना मतलब निकालने के लिए वो कुछ भी कर सकती थी। जैसे ही उसे पता चला कि पंकज क्लास का सबसे होशियार लड़का है, बस फिर क्या था उसने पंकज से दोस्ती कर ली। पंकज जो पहली ही नजर में उसे अपना दिल दे बैठा था भला मना कैसे करता। पंकज कॉलेज के पास ही एक हॉस्टल में रहता था। रोज शाम को पंकज, मान, रंजन और अमित साथ में चाय पीते हुए गप्पे मारते, चारों रूममेट थे और चारों की आपस में खूब पटती थी।
क्या पंकज आज कल प्रिया से बढ़ी पट रही है, हां??”...मान ने चुटकी लेते हुए कहा।
नहीं यार, ऐसा कुछ भी नहीं है, हम सिर्फ अच्छे दोस्त हैं।पंकज ने कुछ सफाई सी देते हुए कहा।
क्या लगती है यार!!”रंजन ने आह भरते हुए कहा।
अरे मैंने तो सुना है कि उसका एक ब्वायफ्रेंड भी है, संभल कर पंकज भाई दिल का मामला है तो सोचा बता दूं।अमित ने पंकज को चेताते हुए कहा।
तुम लोग भी न पता नहीं क्या फालतू करते होपंकज ने बात को वहीं खत्म करने के मूड से कहा।
अरे संभल कर यार, ये लड़कियां भी न बड़ी छुपी रूस्तम होती है। कभी जाहिर ही नहीं होने देती कि इनके दिल में क्या है और दिमाग में क्या खिचड़ी पक रही है मान ने ऐसे कहा जैसे लड़कियों के मामले में तो उसने पीएचडी कर रखी हो।
अरे जब भगवान इन्हें नहीं समझ पाया तो तुम पंकज भाई तुम किस खेत की मूली हो।रंजन ने अमित को ताली मारते हुए कहा।
अब बस भी करो और कल के टेस्ट की तैयारी नहीं करनी क्या ? “ पंकज ने पूछा।
भई तू ही कर ले तैयारी, तुझे ही प्रिया की हेल्प करनी है। हममें से तो किसी को वो घास भी नहीं डालती है। अमित हंसते हुए बोला।
कॉलेज के साथ साथ पंकज और प्रिया की दोस्ती चलती रही। पंकज प्रिया को महंगे-महंगे गिफ्ट लाकर देता, प्रिया जो कुछ भी पंकज से मांगती पंकज उसे लाकर देता। गिफ्ट देने और मिलने के इस सिलसिले लगातार चलता रहा। कॉलेज में भी पंकज और प्रिया के चर्चे होना आम बात हो गई।एक रात पंकज और प्रिया रॉयल रेस्टोरेंट में बैठे डिनर कर रहे थे ।
प्रिया, बुरा न मानो तो तुमसे एक बात पूछूं??”
हां पूछो न।प्रिया ने पंकज के दिए नए फोन में बिजी होते हुए कहा।
तुम्हारा कोई ब्वायफ्रेंड है??”
ब्वायफ्रेंड”… प्रिया नाक को सिकुड़ते हुए बोली, “नहीं मेरा कोई ब्वायफ्रेंड नहीं है, पर तुम ये क्यों पूछ रहे हो
नहीं, बस यूं ही..ये पनीर की सब्जी कितनी अच्छी है न पंकज ने बात काटने के अंदाज में कहा
यूं तो पंकज और प्रिया की दोस्ती को 3 साल होने वाले थे और कॉलेज खत्म होने वाला था। पर इन 3 सालों में पंकज कभी भी अपने दिल की बात प्रिया से नहीं कह पाया।  आज पंकज बार-बार करवट बदल रहा था, न खाने में ध्यान में था न पढ़ने में। आज शाम जब पंकज ने प्रिया को मिलने बुलाया था तो प्रिया ने तबियत खराब होने का बहाना बना दिया था पर फिर वो लड़का कौन था जिसके साथ आज प्रिया घूम रही थी। पंकज ने फैसला कर लिया था कि दो दिन बाद कॉलेज का आखिरी दिन है, अब चाहे जो हो जाए वो अपने दिल की बात प्रिया को बता कर रहेगा। रविवार था और कॉलेज की छुट्टी थी, पंकज ने पूरे दिन का प्लान पहले ही बना लिया था। सुबह 10 बजे पंकज और प्रिया ने पहले घंटों मॉल में वक्त बिताया फिर साथ में लंच और रात का डिनर भी साथ ही किया। इस दौरान पंकज ने प्रिया को अपने दिल की बात कही।
प्रिया, आई लव यू। क्या तुम अपनी सारी जिंदगी मेरे साथ गुजारना चाहोगी, मेरा मतलब क्या तुम मुझसे शादी करोगी
शादी???”प्रिया चौंकती हुई बोली। ओह माई गॉड पंकज तुम्हारा दिमाग तो ठीक है न। यह क्या बहकी बहकी बातें कर रहे हो तुम
प्रिया तुम क्या कह रही है। हम अच्छे दोस्त है और इतने वक्त से साथ है तो...पंकज अपनी बात पूरी कर पाता उससे पहले ही प्रिया बोल पढ़ी
तो क्या तो तुम्हें लगा कि मैं तुमसे प्यार करती हूं। देखो पंकज मुझे नहीं पता कि तुम इन सबका मतलब इस तरह निकालोगे और वैसे भी मैं किसी और से प्यार करती हूं ।दिसंबर में हमारी शादी है और उसके बाद मैं हमेशा के लिए यूएसए चली जाऊंगी। और मैंने तुमसे कभी भी प्यार नहीं किया।
पंकज के सपनों का घर ताश के पत्तों की तरह ढह गया। प्रिया न जाने क्या-क्या बोल कर चली गई पर पंकज के कानों में तो बस यही गूंज रहा था कि उसने उससे कभी प्यार नहीं किया। पंकज रात भर सड़क के किनारे बैठा रहा। सब जान चुके थे कि प्रिया और पंकज के बीच क्या हुया। कॉलेज के फंक्शन के बाद पंकज दूसरे शहर चला गया ये सोच कर की वो अपने अतीत से भाग जाएगा पर वास्तव में भाग तो पंकज खुद से रहा था ।
     नए शहर में पंकज की डिग्री और काबिलियत के बल पर पंकज को नौकरी मिल गई। नौकरी मिलने के बाद पंकज खुद को व्यस्त रखने की बेतहाशा कोशिश करता पर प्रिया के हिस्से का वक्त अकेले गुजारने में नाकाम होता। पंकज ने सबसे दूरी बढ़ा ली थी औऱ एक अपार्टमेंट में जो कि अब उसका घर था रहने लगा। हर महीने घर पैसे भेज दिया करता। मां जब भी फोन करती तो काम की व्यस्तता और थकान का बहाना बना कर पंकज फोन काट दिया करता। 1 साल होने चला था पर प्रिया की कही बातें, उसके साथ बिताया वक्त पंकज के ज़हन में आज भी उतना ही ताजा था , जितना की 1 साल पहले। प्रिया की यादों से छुटकारा पाने के लिए पंकज ने खुद को और व्यस्त रखना शुरू कर दिया। सुबह सबसे पहले ऑफिस आता और अक्सर डबल शिफ्ट करने के बाद घर पहुंचता। घर पहुंचने की उसे कोई जल्दी भी नहीं थी वैसे भी कौन है जो उसका इंतजार कर रहा होगा। पंकज ने अब एक नया और सबसे अच्छा दोस्त बना लिया था...कम्प्यूटर...जिंदगी बस घर से दफ्तर और दफ्तर से ऑफिस तक ही सिमट कर रह गई थी..न किसी से मिलना,,,न बात करना बस हर वक्त कम्पयूटर में उलझे रहना और जब कम्प्यूटर नहीं होता तो प्रिया की यादों में उलझे रहना। पंकज हमेशा से ऐसा कहां था वो तो बेहद खुशमिजाज था पर प्रिया के जाने के बाद सब बदल गया था, अकेलेपन की इस दर्द भरी जिंदगी में वो खुद को बहुत पीछे छोड़ आया था।
 एक दिन पंकज की जिंदगी में खुशी आई। खुशी पंकज की कलीग थी और उसकी ही शिफ्ट में काम करती थी। खुशी पंकज के बगल वाली सीट पर ही बैठती। काम के चलते दोनों दिन में ढेर सारा वक्त एक साथ बिताते। खुशी बिल्कुल अपने नाम के तरह थी। वो पंकज से हल्की-फुल्की मगर ढेर सारी बातें करती। मसलन उसे बारिश बहुत पंसद है, आज आलू के पराठे बनाए है खाओगे?, तुमने वो शाहरूख की नई मूवी देखी?अरे इतने गुमसुम क्यों रहते हो हमेशा तुम पर तो वो गज़ल बिल्कुल फिट बैठती है...
कौन सी पंकज ने पूछा
चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है…”
पंकज हल्का सा मुस्कुराया। पंकज की जिंदगी में प्रिया के साथ बिताए लम्हें खुशी के आने के बाद उथल-पुथल करने लगे थे। वो खुशी से वो सब बातें करने लगा था जो कभी वो प्रिया से किया करता था। गुजरते वक्त के साथ कम्प्यूटर के अलावा अब खुशी भी पंकज की अच्छी दोस्त बन गई थी। पंकज को इस बात का एहसास बखूबी था कि प्रिया के जाने के बाद उसकी जिंदगी कितनी तन्हा हो गई थी, लेकिन खुशी के आने के बाद पंकज की जिंदगी का ये खालीपन भरने लगा था। अब पंकज प्रिया को कहीं न कहीं भूलने लगा था। रोज की तरह पंकज आज भी खुद में उलझा था पर इस बार वो प्रिया की यादों में नहीं बल्कि खुशी की बातों में उलझा था। पंकज एक बार फिर से हंसना सीख गया था, वैसे ही जैसे कॉलेज के दिनों में दोस्तों के साथ मंडली लगा कर हंसा करता था।यूं तो खुशी से मिले पंकज को ज्यादा वक्त नहीं हुआ था पर ऐसा लगता था कि मानों बरसों पुराने कोई दो दोस्त हो। जल्द ही पंकज और खुशी की दोस्ती प्यार में बदल गई। जिंदगी के दिए बुरे अनुभवों से पंकज बहुत कुछ सीख चुका था और इस बार अपनी किस्मत को खुद से खेलने नहीं देना चाहता था। ऑफिस के बाद खुशी के साथ में घर जाते हुए पंकज ने अचानक घुटनों के बल बैठते हुए कहा
खुशी, विल यू मैरी मी?? “पंकज ने खुशी की तरफ अपनी हाथ बढ़ाते हुए पूछा।
खुशी ने पहले तो पंकज की तरफ देखा, फिर शर्मा कर सड़क के चारों ओर खड़े लोगों की तरफ, जो बिल्कुल अंजान थे पर यस कहने को बोल रहे थे।
खुशी ने फिर पंकज की आंखों में देखा और उसके बढ़ाए हाथ पर अपना हाथ रखते हुए बोली
यस
पंकज ने खुशी को गले लगा लिया और आस-पास खड़े लोग ताली बजाने लगे।
खुशी के माता-पिता काफी सालों पहले एक हादसे में उसे छोड़ के जा चुके थे। उनके जाने के बाद उसके बाकी अपनों ने भी उसे ऐसे झटक दिया था जैसे अचानक किसी ओर से उड़कर आए कीड़े को झटक दिया जाता है। पंकज के घरवाले जो न जाने पिछले कितने वक्त से उसे शादी करने को कह रहे थे, उसकी शादी की बात से खुश थे। जिदंगी बिल्कुल तय पन्नों के हिसाब से पलट रही थी।खुशी के पैर ही जमीन पर नहीं पड़ते थे।
मैंने सारे अरेंजमेंट कर लिए है, तुम कल ठीक 10 बजे कोर्ट पहुंच जाना।पंकज ने खुशी को Sk बार फिर याद दिलाते हुए कहा।
मां हम अगले हफ्ते शादी करके गांव आ रहे है पंकज ने मां से फोन पर बात करते हुए कहा।
पंकज के माता पिता बेहद खुश थे। ऐसा लग रहा था कि ढेर सारी काली अंधियारी रातों के बाद दिवाली आने वाली हो। अगले दिन पंकज समय से पहले ही कोर्ट पहुंच गया।सारे दोस्त भी आ गए थे जो विटनेस बनकर साइन करने वाले थे।पंकज पिछले 15 मिनट में खुशी को10 बार फोन करके पूछ चुका था कि वो घर से निकली या नहीं।11वीं बार पंकज ने खुशी को फोन मिलाकर पूछा
घर से निकली य़ा नहीं??”
हां निकली ली...ऑटो, ऑटो खुशी ने मेन रोड पर आकर ऑटो को आवाज देते हुए कहा।
आज मैं बहुत खुश हूं...आई लव यू पंकज
आई लव यू टू खुशी..तुमसे मिलकर लगा कि जिंदगी का अधूरापन अब पूरा हो गया है। अच्छा अब तुम जल्दी आओ।
खुशी ने हां कहकर फोन काट दिया।10 मिनट बाद खुशी कोर्ट पहुंच चुकी थी। खुशी ऑटो से उतरकर सड़क के दूसरी पार खड़े पंकज की ओर बढ़ रही होती है, लेकिन अचानक तेज रफ्तार से आता एक ट्रक खुशी के साथ साथ पंकज की खुशियों को भी रौंद कर चला गया। खुशी ने पंकज की बाहों में ही दम तोड़ दिया और पंकज तकदीर के खेले हुए इस एक औरतमाशे को बुत बनकर देखता ही रह गया। खुशी की मौत के बाद पंकज पूरी तरह टूट गया और एक बार फिर वो शहर छोड़कर चला गया।कहां?? कोई नहीं जानता....

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